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BOTH OF THEM ARE IGNORANT, HE WHO

CONSIDERS THE SOUL TO BE CAPABLE OF

KILLING AND HE WHO TAKES IT IS KILLED;

FOR VERILY THE SOUL NEITHER KILLS, NOR IS KILLED.

(Gita)

 

Hindi

जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको

मरा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते; क्योंकि यह आत्मा

वास्तव में न मारता है और न मारा जाता है

(गीता)


GOD CANNOT BE REALISED BY A MIND THAT IS HYPOCRITICAL, CALCULATING OR ARGUMENTATIVE. ONE MUST HAVE FAITH AND SINCERETY. TO THE SINCERE, GOD IS VERY NEAR; BUT HE IS FAR, FAR AWAY FROM THE HYPOCRITE. (Sri Ramakrishna)

Hindi Translation

जिसका मन कपटी, विवादपूर्ण या अधिक सोच-विचार करने वाला है, वह ईश्वर को नहीं जान सकता। इसके लिए आस्था और विश्वास होना आवश्यक है। भगवान उसके बहुत समीप है जो ईमानदार (सच्चा) है; परन्तु वह कपटी से दूर, बहुत दूर। (श्री रामाकृष्णा)


ASK NOTHING; WANT NOTHING IN RETURN.

GIVE WHAT YOU HAVE TO GIVE; IT WILL COME

BACK TO YOU - BUT DO NOT THINK OF THAT NOW.

IT WILL COME BACK MULTIPLIED - A THOUSANDFOLD -

BUT THE ATTENTION MUST NOT BE ON THAT.

YOU HAVE THE POWER TO GIVE. GIVE, AND THERE IT ENDS.

(Swami Vivekanand)

Hindi Translation

मांगो मत, कुछ चाहो मत, जो कुछ देने के लिए है दे दो।

यह तुम्हे वापिस मिलेगा - परन्तु अभी इसके लिए मत सोचो।

यह कई गुणा - हजार गुणा - होकर वापिस आएगा;

परन्तु तुम्हारा ध्यान इस बात पर नहीं होना चाहिए।

तुम्हारे पास देने की क्षमता है। दे दो, और इसको भूल जाओ।

(स्वामी विवेकानंद)


FORMULAS OF WORSHIP, CONTROL OF BREATH,

SCIENCE, PHILOSOPHY, SYSTEMS VARIED,

RELINQUISHMENTS, POSSESSSION, AND THE LIKE,

ALL THESE ARE BUT DELUSIONS OF THE MIND:-

LOVE, LOVE-THAT'S THE ONE THING, THE SOLE TREASURE

(Swami Vivekanand)

 

Hindi Translation

पूजा की विधियां, जीवन पे नियन्त्रण,

विज्ञान, दर्शनशास्त्र, भिन्न-भिन्न पद्धतियां,

त्याग, अधिकृत-सम्पत्ति, और दूसरे पदार्थ,

यह सब मन के भ्रम हैं,

प्रेम, केवल प्रेम ही अनोखी संपदा है।

(स्वामी विवेकानंद)

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WHOSE MIND REMAINS UNPERTURBED IN SORROW,

WHO IS NOT DELIGHTED BY PLEASURE, AND

WHO IS FREE FROM PASSION, FEAR AND

ANGER, IS CALLED STABLE OF MIND.

(Gita)

 

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दुखों की प्राप्ति होने पर  जिसका मन विचलित नहीं होता,

सुखों की प्राप्ति से भी जो प्रसन्न नहीं होता, तथा जो राग, भय

और क्रोध से मुक्त हो गया है, उसे स्थिरबुद्धि कहा जाता है।

(गीता)

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MAN DOES NOT ATTAIN FREEDOM

FROM THE BONDAGE OF ACTIONS

BY NON-PERFORMANCE OF ACTIONS;

NOR BY MERE RENUNCIATION,

DOES HE ATTAIN PERFECTION.

 

#

मनुष्य न तो कर्म किए बिना,

कर्मों के बन्धन से मुक्ति को प्राप्त

कर सकता है; और न केवल त्यागमात्र से

सिद्धि  को ही प्राप्त कर सकता है।

 

#

न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोश्नुते।

न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति।।

(गीता)

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ONE HAVING ABANDONED ATTACHMENT TO

ACTIONS AND THEIR FRUIT, EVER CONTENT,

WITHOUT ANY KIND OF DEPENDENCE, DOES

NOTHING, THOUGH FULLY ENGAGED IN ACTION.

(Gita)

 

#

जो मनुष्य समस्त कर्मफलों में आसक्ति का त्याग करके

सदैव संतुष्ट तथा संसार के आश्रय से रहित हो गया है,

वह कर्मों में भलीभांति बर्तता हुआ भी

वास्तव में कुछ नहीं करता।

 

#

त्यक्त्वा कर्मफलासंग नित्यतृप्तो निराश्रयः।

कर्मण्यभिप्रवृत्तोSपि नैव किन्चित्करोति सः।।

(गीता)

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